बालक की सूझ बूझ

बालक की सूझ-बूझ

प्रकाश नाम का एक लड़का था। वह नौवीं कक्षा में पढ़ता था। उसके स्कूल का रास्ता कुछ दूर तक रेल लाइन के किनारे-किनारे होकर जाता था। एक दिन उस रास्ते से गुजरते समय प्रकाश एक जंगह ठहर गया यहाँ रेल की पटरी उखड़ी हुई थी। वहाँ से जाने वाली रेलगाड़ी के डिब्बे पटरी से उतर कर गिर सकते थे। भीषण दुर्घटना की संभावना थी। प्रकाश अभी यह सोच ही रहा था कि उसे एक रेलगाड़ी दूर से आती हुई दिखाई पड़ी। उसने फौरन अपने कंपास से ब्लंड निकाला। उसने ब्लेड से अपनी उँगली चीर दो प्रकाश ने सफेद रंग की कमीज पहन रखी थी। उंगली से निकले खून से उसने अपनी कमीज रंग ली। वह अपनी लाल कमोज लेकर पटरी पर खड़ा हो गया। लाल झंडी की तरह उसे फहराने लगा। रेल के ड्राइवर ने दूर से उसे देखा और गाड़ी रोक दी। एक बड़ी दुर्घटना होते-होते बच गई। लेकिन अधिक खून यह जाने से प्रकाश बेहोश होकर गिर पड़ा। रेलगाड़ी के गार्ड ने प्रकाश को गिरते हुए देखा वह तुरंत गाड़ी से नीचे उतरा और उसने प्रकाश का प्राथमिक उपचार किया। कुछ देर बाद उसे होश आ गया। गार्ड ने प्रकाश के साहस और उसकी सूझ-बूझ को बहुत प्रशंसा की। उसने कहा, ‘मैं राष्ट्रपति को पत्र लिखकर वीरता पुरस्कार के लिए तुम्हारे नाम की सिफारिश करूंगा।” 26 जनवरी को राष्ट्रपति ने उसकी वीरता के लिए उसे पुरस्कार से सम्मानित किया। सीख संकट के समय साहस और सूझ-बूझ से काम लेना चाहिए।

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